जब लक्ष्मण जी को दुख में देख हनुमान जी को क्रोध आ गया...
हनुमान जी के पास इतना बल था जिसकी तुलना किसी से नहीं की जा सकती थी जब श्री राम के दुख और विलाप देख हनुमान जी बोले....
अगर आपकी आज्ञा हो. तो चंद्र को एक कपड़े की तरह निचोड़कर. उसका सारा अमृत लक्ष्मण जी के सिर पर डाल दू. पाताल में सर्पों का दल जो अमृत की रक्षा कर रहा है उस अमृत कुंड को ही उठा लाऊ.
आकाश से सूर्य को निकालकर राहु से ढक दू. जिससे सूर्य कभी निकले ही नहीं.देवताओं के वेध आसवानी कुमार को ही उठा लाऊ.आखिर हनुमान जी ने यहॉ तक कह दिया. में मेरे प्राण निकालकर लक्ष्मण जी में डाल दु.



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें